Friday, 23 June 2017

प्यास क्या होती है ये मुझे तब पता चला


प्यास क्या होती उस रात पता चला.... , पढिये ये आपबीती कहानी

जोनल गेम्स में एकबार मुझे कॉलेज की तरफ से खुर्जा जाना पड़ा , चुकी मैं कॉलेज की तरफ से  वॉलीवाल का एक सीनियर ओर पास आउट स्टूडेंट था , मेरे जूनियरो के विशेष आग्रह पर में भी उनके साथ जोनल गेम्स में पहुच गया,
दुष्यन्त राघव नाम का मेरा एक  जूनियर था जो वही खुर्जा से बिलोंग करता था , वैसे तो हम सभी खिलाड़ियों के लिए कॉलेज होस्टल में ठहरने की विशेष सुविधा उपलब्ध थी , फिर भी दुष्यन्त के विशेष आग्रह पर मेने ओर मेरे एक दोस्त अमित शर्मा ने  उसके घर पर ही ठहरना उचित समझा ,
हमारे साथ एक स्टूडेंट ओर था जिसका नाम अभिनव चौहान था जो दुष्यन्त का मित्र ओर मेरे लिए छोटे भाई की तरह था ।
अब हम तीनों दुष्यन्त के साथ उसके घर की ओर चल पड़े ,
उस रात को दुष्यन्त के घर पर हमारी जमके खातिरदारी हुई ,

(उस रात ओर उन यादगार पलो के लिए दुष्यन्त को में आज यहां से धन्यवाद देना चाहूंगा )

खाना खा पीने के बाद हमारी सोने की व्यवस्था ऊपर वाले कमरे में कि गयी ।
दुष्यन्त हम तीनों का बिस्तर ऊपर वाले कमरे में लगा कर चला गया,
उस रात दुष्यन्त की सबसे बड़ी गलती ये रही कि वो सीढियो वाले दरवाजे को बाहर से बंद करके चला गया ,
मतलब अब हम तीनो ऊपर वाली छत पर पूरी तरह लॉक हो चुके थे ,ओर इस बात की हमे कोई खबर भी न थी ,
अगले दिन अभिनव का सांस्कृतिक प्रोग्राम था उसने नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया हुआ था , तब मैंने अभिनव को कहा कि चल डांस का रिहर्सल कर ले कल सुबह तेरी इवेंट भी है , तब अमित ने भी मेरी हा में हां मिलाते हुए उसे कहा कि हां चलो तुम्हारा रिहर्सल हो जाएगा और हमारा मनोरंजन भी ।
तब अभिनव ने उस रात हमे डांस करके दिखाया ओर वाकई उसका डांस काबिले तारीफ भी था क्योंकि उसने राजपकपूर के गाने "मेरा जूता है जापानी" पर जबरदस्त एक्टिंग के साथ सेम टू सेम रोल प्ले किया था ।उसने ओर भी गानों पर एक से एक डांस किया ।
बस हम रात भर युही मस्ती करते करते सो गए ,

अब रात के 2 बजे थे मेरी सोते सोते आंख खुली, मेरा गला सूख रहा था मुझे बड़े जोरो की प्यास लगी हुई थी , मेने पूरे कमरे में नजर दौड़ाई कही भी पानी रखा हुआ दिखाई नही दे रहा था , दरअसल खाना खाने के बाद में कभी भी पानी नही पीता ओर इसलिए उस दिन भी खाना खाने के बाद मेने पानी नही पिया था , इसलिए जोरदार प्यास लगनी तो निश्चित सी बात थी,
थोड़ी देर तक खाट पर लेटा हुआ मैं पानी के बारे में सोच ही रहा था कि अभिनव की भी प्यास के कारण आंख खुल गयी,
ओर उसने भी उठते ही पानी पीने की इच्छा जताई ओर बोला मोहित भाई बहुत तेज़ प्यास लगी हुई है और साथ ही साथ बोल उठा आप क्यों जगे हुए हो .?

मेने भी कहा जिस वजह से तू अब जगा है मेरी वजह भी वही है ।

अब मेने उसे कहा चल नीचे जा ओर पानी ले आ बुरी तरह से प्यास लगी है और गला भी सूख रहा है , खेर उसने तुरंत मेरी आज्ञा का पालन किया और शर्दी की उस रात में गर्म रजाई का मोह त्यागकर बिस्तर से उठा , जैसे ही वो रूम से बाहर निकल कर सीढियो (जिसे गांव में जिन्ना भी बोलते है ) पर लगे दरवाजे पे पहुचा तो पाया दरवाजा बाहर से लॉक है , वापस रूम में लौटकर उसने मुझे बताया कि भाई नीचे जाना नामुमकिन है क्योंकि सीढियो का दरवाजा बाहर से बंद है । हम दोनों की चहलकदमी की आवाज से अब अमित शर्मा भी उठ गया ओर उसने भी उठते ही एक ही चीज मांगी "पानी" 

यानी हम तीनो अब जोम्बी की तरह हो गए थे,
एक के बाद एक मे वही असर दिख रहा था , प्यास ................
जब अमित को पानी की सारी कहानी बताई तो उसने अभिनव को कहा अरे दुष्यन्त का फोन लगा .....
वो पानी लेकर आएगा ।
दिल अचानक से खुश हुआ चलो ये रस्ता तो है हमारे पास क्यों न दुष्यन्त को फोन लगाया जाए ,
प्यास जोरो पर थी , गला सूख रहा था ,पानी का नाम लेते ही प्यास अपनी चरमसीमा पर पहुँच जाती थी ,

तभी नम्बर डायल करते ही आवाज आई कि -"आप जिस नम्बर पर सम्पर्क करना चाहते है वो अभी बन्द है "

धत तेरी की गयी भैंस पानी मे आखिरी उम्मीद भी अब टूट चुकी थी हम तीनो का प्यास के कारण बुरा हाल था ,सुबह होने में अभी 4 घंटे बाकी थे , शर्दी की उस रात में प्यास की वजह से हमे पसीना आ रहा था , बुरी तरह फसे अब क्या करे ?आखिर अनजान जगह पर इतनी रात गए हल्ला गुल्ला करके किसी को जगाना भी तो उचित न था ।

में ओर अमित अपनी अपनी खाट पर बैठे थे , ओर अभिनव पानी की जुगत में इधर उधर घूम रहा था कमरे में सिर्फ वो गिलास था जिसमे हमने रात को दूध पिया था ,हम लगभग उस गिलास में एकसौ बार झांक कर देख चुके थे शायद पानी कही से इसमे आ गया हो ,
बस उसी गिलास को हाथ मे लिए अभिनव इधर से उधर घूम रहा था , शायद उसको हम दोनों का प्यास के कारण छटपटाना देखा न जा रहा था ।तभी अभिनव रूम से बाहर गया और थोड़ी देर बाद अंदर आया उसके हाथों में वही गिलास था , उसने मुझसे कहा गुरुजी ये लो पानी पियो ...में बड़ा हैरान था ....पानी ..?? अरे कहा से लाया .?

उसने कहा पहले पियो मेने कहा हम तीन है और ये एक गिलास पानी ..????

उसने कहा चिंता मत करो मेने पी लिया है अब तुम भी पियो ...।
मेने खटाक से पूरा गिलास गटक लिया।
लम्बी सांस लेते हुए मेने उससे कहा एक ओर मिलेगा उसने कहा बिल्कुल अभी लाया ।
थोड़ी देर बाद वो फिर एक गिलास पानी ओर ले आया ऐसे करके मेने तीन गिलास पानी पिया , उसके बाद अमित ने भी यही सवाल किया के पानी ला कहा से रहा है तू..?
वो बस यही कहता कि गुरुजी पहले आप पानी पियो ......।
हम दोनों पानी पी चुकने के बाद एक लंबी सांस ले रहे थे उस समय हमे जो आनंदमय अहसास हो रहा था उसे शब्दो मे बया करना मुश्किल है, ऐसा लग रहा था मानो मृत शरीर में नई चेतना आ गयी हो ,
अब  हम दोनो ने अभिनव से पूछा बता अभिनव पानी कहा से लाया तू..?
उसने कहा रहने दो गुरु जी आपकी प्यास बुझ गयी और क्या चाहिए आपको ,
हमने कहा नही ये रहस्य तो तुझे बताना पड़ेगा यहां दूर दूर तक कोई पानी का साधन नही फिर भी तू पानी ले आया...कैसे..????

तब जोर देने पर उसने कहा कि गुरुजी गुस्सा मत होना
" में छत की आखिर में बनी लेटरिंग (टॉयलेट) की टोंटी से पानी लाया हूं.............樂

------------कुँवर मोहित राणा

Diggvijay Singh Rajput
Dushyant Raghuvanshi
Amit Kumar

Wednesday, 21 June 2017

"सर तुस्सी ग्रेट हो "दिवाकर शुक्ला की कलम से


My self - Diwakar Shukla s/o Ramakant shukla
Vill- pariyawa
Post- derauva
Dist- Pratapgarh
Pin - 230128

प्रिय मोहित राणा सर जी -

सर जी नमस्ते आप मुझे बहुत ही अच्छे लगते है ।मेने अपने जीवन मे बहुत से आदमियों से मिला लेकिन मुझे आप जैसा समझदार व्यक्ति नही मिला ।
आप बहुत ही समझदार ओर नेक फरिस्ते हो ।अपने अपनी जिंदगी मे बहुत कुछ खोया है ,कही खेल के लिए तो कही दोस्तो के लिए कही किसी ओर के लिए ,लेकिन सर जी खोना उतना ही चाहिए "एक सीमा तक"।सर जी आप अपनी लाइफ को sequre बनाइये ,में आप से आशा करता हु की आप एकदिन जरूर कामयाब होंगे । मेरा दिल कहता है । कि वो दिन दूर नही जब आप एक कामयाब व्यक्ति के रूप में नजर आएंगे ।
Best of luck

" जिंदगी है तो झमेले भी है
खुशी गम के मेले भी है
सफलता उन्ही के कदम चूमती है
जो मुश्किलों में चले अकेले है "

सर जी आपसे वो मिला जो आजतक किसी से भी नही मिला
वे प्रेरणा पूर्ण बाते जिन्हें सुनने के बाद शरीर मे एक नया उत्साह
कुछ ऐसा करने के बारे में जिससे कि मेरा नाम हो ,ओर शरीर मे एक नई energy सी आ जाती है
जब आप हमसे बाते करते है ।
सर जी आपके बारे में जितना कहा जाए उतना ही कम है ।

सर जी
.........तुसी ग्रेट हो /

(मेरी डायरी का एक अंश)


Tuesday, 13 June 2017

एग्जाम रूम में जब मुझे बाहर निकाल दिया गया

बी.ए के पेपर में जब मुझे अपमानित करके एग्जामिनर ने क्लास से बाहर कर दिया था । लेकिन उसके बाद भी में उदास होने की बजाए बहुत खुश था । पढिये मेरी ये सच्ची घटना--

बात उन दिनों की है जब में बी.ए
प्रथम वर्ष का छात्र था , असल मे मैं बचपन से ही बहुत ही सिद्धान्त वादी इंसान रहा हु । ओर इसीलिए भारतीय संस्कृति और इससे जुड़ी हर चीज का में सम्मान करता हु
में बीए में इंग्लिश लेने वाला था ,
लेकिन फिर मेरे एक दोस्त ने मुझपर एक ऐसा तंज कस दिया कि मुझे अपने निर्णय को बदलना पड़ा, उसने कहा तू तो बड़ा हिंदी हिंदी करता था अब अंग्रेज बनेगा ?
उसकी ये बात मुझे अखर गयी ओर मेने सोचा आखिर में हिंदुस्तानी हु ओर अपनी मातृभाषा का बहुत सम्मान भी करता हु । फिर आज इंग्लिश को हिंदी की अपेक्षा क्यों ज्यादा वरीयता दे रहा हु । आखिर मुझ जैसा राष्ट्रभक्त ही हिंदी को प्राथमिकता नही देगा तो फिर कोन देगा .? बस यही सोचते सोचते मेरा हिंदी प्रेम उमड़ कर परवान चढ़ गया और मेने अंग्रेजी छोड़ संस्कृत ले ली ।
अब हमे क्या पता था हमने अपना सर गिलोटिन मशीन में डाल दिया था ,निकाले तब भी मरे ओर डाले रखे तब भी मरे,
क्योंकि संस्कृत का तो "स:" भी मुझे न आता था ।
इसीलिए में संस्कृत के लेक्चर में ज्यादार चुपचाप ही रहता था ।
कई बार प्रोफेसर कोई प्रश्न पूछती तो में जानते हुए भी वो बता न पाता था , अब पूछो क्यों क्योंकि मेरी संस्कृत की क्लास में , मै अकेला ही लड़का था , वैसे तो ओर भी दो थे लेकिन वो मुश्किल से ही कॉलेज आया करते थे ।
अब 30 लड़कियों में, मैं अकेला लड़का था....इसलिए मेरे अंदर झिझक का होना तो स्वभाविक था ही ।
इस कारण से क्लास में ज्यादातर लडकिया कभी कभी मेरी चुटकी भी ले लिया करती थी।
अब में संस्कृत पड़ता तो रोज था लेकिन किसी को महसूस नही होने देता था , सच बताऊ तो वार्षिक परीक्षा आते आते ,में उन सबसे बहुत ज्यादा
Knowledgeble हो गया था ।

खेर परीक्षा आ गयी और में अपनी पूरी तैयारी के साथ एग्जाम रूम में जाकर बैठ गया ,
अब जब तक एग्जाम पेपर हाथ मे न आ जाये तब तक शरीर मे एक बैचेनी सी रहती है ,
खेर मेरे हाथ मे एग्जाम पेपर आ ही गया पेपर देखते ही मेरा चेहरा खिल उठा क्योंकि जिन प्रश्नों की मेने तैयारी की थी वही प्रश्न एग्जाम में आये हुए थे ,
मेने वो झट से सारा पेपर डेढ़ घंटे में कर दिया और आराम से चुप चाप बैठ गया ,वैसे भी जिस छात्र के पास इंटर में पीसीएम जैसे भारी भरकम सब्जेक्ट हो उसके लिए ऐसा पेपर बहुत ही सरल था ,
में पेपर करने के बाद अपने आस पास के सभी स्टूडेंट पर नजर घुमाकर देख रहा था ,तभी मेरे बाये तरफ एक लड़की जो पूरी क्लास में खुद को सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट मानती थी ओर कुछ हद तक वो होशियार थी भी।किन्ही कारणों से उस लड़की का नाम मैं यंहा सार्वजनिक नही कर सकता ।
उस लड़की ने मुझसे इसारे में दबी सी आवाज से पूछा तुमने सारा पेपर सॉल्व कर दिया , मेने भी गर्दन हिलाकर हा कर दी । तब उसने कहा plz कुछ क्युस्चन मुझे भी बता दो , तब फुस फूसि सी आवाज में मैने गर्दन नीची करते हुए उसे कई सवालों के उत्तर बता डाले अब आखिर टीचर तो टीचर होता है ,
तभी जो हमारे रूम की एग्जामिनर थी उसने मुझे आकर पकड़ लिया । और मेरी उत्तर पुस्तिका ले ली, मेरे कुछेक सवाल बाकी थे जिनका मुझे नही पता था , में सोच रहा था इन्हें बाद में तुक्के मार कर कुछ वैसे ही कर दूंगा जैसे तीन चार पार्टी मिलकर सरकार बनाती है या फिर क्रिकेट मैच के अंतिम ओवरों में जैसे जाहिर खान बेटिंग करते वक़्त आड़े तिरछे शॉट मार करके रन कूट भी लेता है और नही भी ।
बस में भी कुछ वैसी ही जुगत लगा कर उन सवालों को दागने वाला था, लेकिन तभी टीचर ने आकर मेरी उत्तर पुस्तिका ले ली और एग्जाम रूम से बाहर जाने को कहा, मेने मेडम से  rqst भी की । लेकिन कोई बात न बनी
तभी टीचर ने कहा अच्छा ये "बताओ तुम इस लड़की से उत्तर पूछ रहे थे या फिर इसको बता रहे थे ".? उसके बाद ही में तुम्हे तुम्हारी उत्तर पुस्तिका वापस दूंगी ।
अब मेने उस लड़की की तरफ देखा जो शर्म के मारे अपनी आंखों को झुकाये खुद में ही सिमट रही थी ।
बस पता नही मुझे क्या हुआ उस दिन मेने टीचर से पहली बार झूट बोला । मेने टीचर से कहा - कि मेम में ही उस लड़की से सवाल पूछ रहा था । उसके बाद तो मेम ने सीधा सीधा मुझे बाहर जाने को कहा , बोली कि तुम फिर इसे परेशान करोगे अब तुम्हे पेपर शीट नही मिलेगी । "गेट आउट "

सभी स्टूडेंट के सामने ये मेरा बहुत बड़ा अपमान था ।
खेर फिर भी मेरे चेहरे पर लेश मात्र भी निराश न थी ।
क्यों .? क्योंकि किसी के लिए किए गए त्याग और समर्पण का अपना एक अलग ही आनंद है ।
मन में एक गहरी शांति थी । और चित्त भी प्रश्न था ,
एग्जाम खत्म हुआ सब स्टूडेंट बाहर आ गए। में वही पास की दुकान पर खड़ा कोल्ड ड्रिंक पी रहा था , जैसे ही बस आई तो सब  स्टूडेंट बस में चढ़ गए लेकिन वो लड़की नही चढ़ी , जब अगली बस आई तो में उसमे चढ़कर बैठ गया झट से वो लड़की भी मेरे पास वाली सीट पर आकर बैठ गयी , तभी में अचानक से ठिठक गया क्योंकी गांव देहात में ऐसी स्थिति में बैठे लड़के और लड़की को लोग संवेदन सील दृष्टि से देखते है । में अपने को इस स्थिति में असहज महसूस कर ही रहा था कि तभी उस लड़की ने कहा ..थैंक्यू मोहित ।
ओर फिर प्रश्न किया कि तुमने एग्जामिनर से झूठ क्यों बोला?
बस मेने उसे इतना ही कहा - कि वैसे भी क्लास में ओर टीचर की दृष्टि में मेरा कोई विशेष सम्मान नही है में अपमानित हुआ कोई बात नही वैसे भी हम लड़को की इज्जत बेइजती कोई मायने नही रखती। लेकिन तुम पूरी क्लास में सबसे ज्यादा होशियार हो और तुम्हारी बहुत रेस्पेक्ट भी है । बस इसीकारण से मैने झूट बोल दिया ,
ताकि तुम्हारा सम्मान बना रहे ।
मेरा उत्तर सुनकर उस लड़की ने अपनी भीगी आंखों से कहा कि मुझे नही पता था ऐसे भी लड़के होते है जो लड़कियों की इतनी रेस्पेक्ट करते है ।
तुम्हें दिल से थैंक्यू मोहित ।

मेरा बस स्टैंड आ चुका था , में गाड़ी से उतरकर अपने रास्ते की ओर चल पड़ा , लेकिन गाडी के आंखों से ओझल होने तक वो लड़की मुझे देखती रही शायद उसकी बात अभी खत्म नही हुई थी...

-----------------कुंवर मोहित राणा


आख़िर ज़ीवन है क्या ?

 एक लंबे समय बाद आज कुछ लिखने का मन है मुझे नहीं पता था की आज भी कुछ लोग मेरी विचारधारा को उतना ही पसंद करते है जितना पहले पसंद किया करते थे...