Wednesday, 31 May 2017

मेरे बीते कल का स्वर्णिम दौर


मेरे बीते कल का एक स्वर्णिम और मीठा अनुभव अवस्य पढ़े और पूरा पढ़े.......

में कुँवर मोहित राणा आज अपने जीवन के उन कर्मो का मूल्यांकन करने जा रहा हु
जो कर्म मेने आप सबके समक्ष किये ! इसलिए मेरे इन कर्मो का मूल्यांकन अब आपके हाथो में हे
मेरी अच्छाईयां ही नहीं अपितु मेरी बुराइयो को सुनना में कुछ ज्यादा ही पसंद करूँगा.....
अतएव आप सब मेरी बुराइयो पर भी स्वतंत्र होकर प्रकाश डालना !
आप सबकी लेखिनी से लिखा हर वो शब्द मुझे सदैव ये स्मरण कराता रहेगा कि मैं जहां रहा वहा मेने कितना प्यार बिखेरा अथवा कितना प्यार बटोरा..!
प्रिय स्नेही मित्रो  मेरे छोटे भाइयो अथवा प्यारे जूनियरों "मैं आप सबके प्रेम का कृतघ् व आभारी हु ...................

मुझे पता था कि वो रास्ते कभी मेरी मंजिल तक नहीं जाते थे !
फिर भी में चलता रहा क्योंकि उस राह में कुछ अपनों के घर भी आते थे !!

जितनी भीड़ बढ़ रही ज़माने में !
लोग उतने ही अकेले होते जा रहे हे !!

जीवन में सबसे कठोर दौर यह नहीं होता हे ! जब कोई तुम्हे समझता नहीं हे !
बल्कि यह तब होता हे जब तुम अपने आप को नहीं समझ पाते ..!!

सदैव अपनी  छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश करे ..
क्योकि इंसान पहाड़ो से नहीं छोटे छोटे पत्थरो ठोकर खाता हे..!!

ऐ मुसीबत ला तेरे पेरो को मरहम लगा दू क्योकि ...
तुझे भी तो चोट आई होगी मेरी किस्मत को ठोकर मरकर..!!

"मेरी उम्र अभी मात्र 24 या 25 वर्ष की ही होगी किन्तु अपनी उम्र के इस छोटे से पड़ाव में मेने जो अनुभव किये उनमे से एक मुख्य "अनुभव" को मै यहाँ अपनी लेखिनी के माध्यम से कहना चाहूँगा
ये तो जीवन चक्र हे मुझे पता हे और आप सब भी जानते हो जीवन आनी जानी माया हे !
जो चलता रहता हे और आगे भी चलता रहेगा समय किसी के लिए नहीं ठहरता......!
लेकिन एक अनुभव जो मेने किया उसको आज में आप सब से कहूँगा - मेरे प्रिय स्नेही मित्रो व मेरे छोटे भाइयो (जूनियर्स) एक समय मेरी जिंदगी में ऐसा आया जब मुझे लगा की ये समय शायद रुक गया हे ! मानो जीवन बस यही हो जिंदगी ठहर सी गयी हो जैसे ! जी हां ये वो समय था जब मै एक स्टूडेंट था और जब तक में स्टूडेंट रहा तब तक जिंदगी और समय की रफ़्तार को न भांप सका ! शायद इसलिए क्योकि मै अपने जीवन के उस स्वर्णिम दौर को जी रहा था जिसमे केवल खुशिया ही खुशिया थी ! खुशियो के सिवा कुछ था ही नहीं कब दिन होता कब रात होती कुछ पता ही नहीं चलता था !
मै आशाओ के अपने उस नये जीवन को जी कुछ इस प्रकार से रहा था  जैसे ÷
किसी बीज का जमीन की भूर - भूरी मिटटी से अंकुरण हो रहा हो !
और उसकी प्यारी प्यारी कोमल नन्ही पत्तिया जैसे इस नई जिंदगी को अपनी बाँहो में लेने के लिए हाथ फ़ैला रही हो ! वेसे ही मेरी आशाओ और नई चेतना के कारण मेरी आँखों में एक चमक पैदा हो रही थी !!
मानो में भी इस दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने के लिए तैयार बैठ था ! लेकिन वो समय कब बीता कुछ पता ही नहीं चला ! इसलिए मुझे लगा की शायद उस पल जिंदगी विराम अवस्था में हो
कितनी मस्ती के दिन होते थे वो सच आज भी स्मरण करते ही आँखे गीली हो आती हे !
उस स्वर्णिम दौर की यादे आज भी मेरी स्मृति  में शेष हे ! और शायद अब तो सदैव ही मेरी स्मृति में जीवित रहेंगी ! वो रूम में मस्ती करना दिन भर घूमना और फिर रात को देर तक न सोना घंटो तक झगड़ना किसी के सोते हुए कान खीचना तो किसी के बाल नोचना किसी की रजाई खीचना तो किसी का बिस्तर खिसकाना ! वो घंटो केन्टीन में बैठे रहना और चाय पे चाय पीना
वो क्लास की मस्ती किसी का पेन गुम हो जाना तो किसी की शर्ट पे टेटू बनाना !
टीचर को परेशान करना और एक दूसरे की अटेंडेंस लगा आना बगैर कॉलेज जाए ही class कर आना ! और हाँ वो नोटिस बोर्ड पर गलत सुचना चिपका आना और होस्टल में चुपके से घुस जाना आज भी सब कुछ याद हे .........!!!!!
आज भी ये सब घटनाये मेरे दिल और दिमाग में इस तरह से जिन्दा हे जैसे कल ही की बात हो
कितना मस्ती भरा समय था वो जैसे हम सब दोस्त एक परिवार हो ! एक ऐसा परिवार जिसमे रिश्ते खून के रिश्तों से भी ज्यादा मजबूत होते थे ! चोट दोस्तों को लगती थी लेकिन दर्द हमे होता था ! वास्तव में आज भी अपने उस समय को बहुत मिस करता हु ! लेकिन क्या करू समय की इस रफ़्तार के आगे में हार गया ! सब कुछ झूट गया एक झटके में जैसे ! नहीं तो मुझे आज भी याद हे - वो पल जब गलती एक करता था और पता होते हुए भी पिटते सारे थे ! अब आप ही बताओ कहा मिलेगा ऐसा प्यार .? कहाँ मिलेगी ऐसी एकजुटता ? कही नहीं खूब खोज कर लेना
सिवाय स्टूडेंट लाइफ के और कही नहीं मिलेगी !
इतना समर्पण इतना त्याग इतना सहयोग और कही नहीं मिलेगा जीतना आपको इस स्टूडेंट लाइफ में मिलेगा ! अब ओरो का तो मुझे नहीं पता किन्तु ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव हे !जो मेने किया
आप सब इससे कितना सहमत हे ये तो तब ही पता चलेगा जब आप इस जिंदगी को जी चुके होंगे
शायद में आपको दिखा नहीं सकता किन्तु मेरी आँखों में लिखते हुए अब भी आँशु हे !
उस पल को याद करते हुए में भावुक हो जाता हु ! शायद अब ये मेरी प्रकृति बन चूका हे ! जिसे बदल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हे ! और अब आप सबका इतना प्यार पाकर में खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हु ! तुम सबने मुझे मेरे कॉलेज लाइफ की याद दिला दी अब में उस समय में वापस तो नहीं जा सकता इसलिए ही तुम सबमे अपने आप को खोजता रहता हु !
मेरी हालात उस मृग की भाँती हे जो कस्तूरी की सुगंध में जंगल जंगल भटकता रहता हे किन्तु उसे उसकी सुगंध के सिवा और कुछ न प्राप्त होता हे ! क्योकि वो कस्तूरी उसी के अंदर हे अब मुझे पता होते हुए भी उसी अहसास को पाने के लिए तुम सबके बीच आ जाता हु ! भले ही मुझे मेरा बिता कल वापस न मिलता हो लेकिन वो कस्तूरी की सुगंध का सुखद एहसास मिलता हे !
जिसे पाकर कुछ हद तक मेरी तृष्णा शांत हो जाती हे !आज भी ऐसा मन करता हे आपको किन शब्दों में बताऊ शायद ये मेरी भावनाओ की ही आवाज हे जो मेरे जैसे किसी हृद्यघाति ने कहे हो
आज मेरी भी यही इच्छा हे ----------

शायद फिर वो तकदीर मिल जाए जीवन के वो हसीन पल मिल जाये !
चल फिर बैठे क्लास की लास्ट बेंच पे शायद वो पुराने दोस्त मिल जाये !!

अब तो बस जैसे यही एक ख्वाहिस बची हो...जैसे मेरा रोम रोम इसे ही अब हर समय  महसूस करता हो ! मानो ये शब्द मेरे ही हे...........

याद आते हे वो स्कूल के दिन ! ना जाते थे स्कूल दोस्तों के बिन !
कैसी थी वो दोस्ती कैसा था वो प्यार ! एक दिन की जुदाई से डरते थे जब आता था शनिवार
चलते चलते पत्थरो पर मारते थे ठोकर ! कभी हंसकर चलते थे तो कभी नाराज होकर
कन्धे पर बेग लिए हाथो में बोतल पानी !
किसे पता था बचपन की दोस्ती को बिछुडा देगी जवानी !!
याद आते हे वो रंगो से भरे हाथ ! क्या दिन थे वो कभी लंच करते थे साथ !
छुट्टी की घंटी बजते ही भागकर बहार आना फिर हस्ते हस्ते दोस्तों से मिल जाना
काश वो दिन फिर लौट आते ! दिल में बचपन के फूल फिर से खिल जाते ..
काश वो दिन फिर लौट आते.........काश वो दिन...........

शायद ऐसा हो पता और वो दिन मुझे फिर से मिल पाते तो मेरी बस यही इक  इच्छा  होती कि चलो यारो तैयार हो जाओ फिर से स्कूल की बैंड बजानी हे  !!
पर काश इसा हो पता ? इसलिए मै तो सिर्फ अपने आप से और आप सब से यही कहना चाहूँगा--

कुछ सालो बाद ये पल बहुत याद आएंगे !
जब हम सब दोस्त अपनी मंजिल पर पहुच जायेंगे !
अकेले जब भी होंगे साथ गुजरे हुए लम्हे याद आएंगे !
पैसे तो बहुत होंगे पर शायद खर्च करने के लिए लम्हे कम पड़ जायेंगे !
इक कप चाय याद दोस्तों की दिलाएगी .!
यही सोचते सोचते फिरसे आँखे नम हो जाएँगी !
दिल खोलकर जी लो यारो ..........
जिंदगी अपना इतिहास फिर नहीं दोहरायेगी.......!!

क्या करु आखिर अब इन यादो का ..? क्योकि इन्हें अब में भुलाना भी तो नहीं चाहता !
क्योकि ये वो यादे हे जो मेरी जिंदगी में चार चाँद लगा गयी ! अब तो सिर्फ में इन यादो को संजोकर रखना चाहूँगा और आपको भी मेरा एक सन्देश हे--- प्यारे दोस्तों इन लम्हों को जी भर के जियो और खुलकर जियो ताकि आप भी मेरी तरह स्मरण करते समय गर्व् महसूस करो /

और वो शरारत तो आज भी याद हे ...जब टूथपेस्ट को जलाकर उसे छत से चिपकाना !
जैसे स्टूडेंट के रूम की यही पहचान हो कोई भी वो काली धब्बों वाली छत को देखकर कह देगा की ये किसी स्टूडेंट का रूम रहा होगा .! ऐसी थी हमारी कॉलेज की लाइफ जिसे हमने जी भरके जिया .......

रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हु !
ऐ मुश्किलो देखो में तुमसे कितना बड़ा हु .!!
मेरी तरह आप भी ये जज्बा रखो और जिंदगी से कहो ......
जिंदगी सुन तू यही पे रुक हम जमाना बदलकर आते हे !
मेरे प्यारे दोस्तों अब वक़्त आपके हाथो में हे ! क़ैद कर लो हमेसा के लिए इस वक़्त को  अपने हाथो में और  जी लो अपने स्वर्णिम दौर को ! बस आप सबसे मेरी एक विनती हे की आप भी मेरी  यादो में साझेदारी निभाना चाहते हो तो में आपको एक अवसर देता हु अपनी डायरी लिखने का अगर आप ऐसा करते हो तो यक़ीन मानो आप हमेसा के लिए मेरी स्मृति पटल पर छाप छोड़ जाओगे ..! सिर्फ मेरे लिए उस ईस्वर से एक प्रार्थना करना कि वो मेरे दोस्तों और छोटे भाइयो (जूनियर्स) को हमेसा खुश रखे !!
आपका अपना भाई..........
____________________________________________लेखक - कुँवर मोहित राणा

(मेरी डायरी का एक अंश यह लेख spcl मेरे दोस्तों और जूनियर्स के लिए)


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