बी.ए के पेपर में जब मुझे अपमानित करके एग्जामिनर ने क्लास से बाहर कर दिया था । लेकिन उसके बाद भी में उदास होने की बजाए बहुत खुश था । पढिये मेरी ये सच्ची घटना--
बात उन दिनों की है जब में बी.ए
प्रथम वर्ष का छात्र था , असल मे मैं बचपन से ही बहुत ही सिद्धान्त वादी इंसान रहा हु । ओर इसीलिए भारतीय संस्कृति और इससे जुड़ी हर चीज का में सम्मान करता हु
में बीए में इंग्लिश लेने वाला था ,
लेकिन फिर मेरे एक दोस्त ने मुझपर एक ऐसा तंज कस दिया कि मुझे अपने निर्णय को बदलना पड़ा, उसने कहा तू तो बड़ा हिंदी हिंदी करता था अब अंग्रेज बनेगा ?
उसकी ये बात मुझे अखर गयी ओर मेने सोचा आखिर में हिंदुस्तानी हु ओर अपनी मातृभाषा का बहुत सम्मान भी करता हु । फिर आज इंग्लिश को हिंदी की अपेक्षा क्यों ज्यादा वरीयता दे रहा हु । आखिर मुझ जैसा राष्ट्रभक्त ही हिंदी को प्राथमिकता नही देगा तो फिर कोन देगा .? बस यही सोचते सोचते मेरा हिंदी प्रेम उमड़ कर परवान चढ़ गया और मेने अंग्रेजी छोड़ संस्कृत ले ली ।
अब हमे क्या पता था हमने अपना सर गिलोटिन मशीन में डाल दिया था ,निकाले तब भी मरे ओर डाले रखे तब भी मरे,
क्योंकि संस्कृत का तो "स:" भी मुझे न आता था ।
इसीलिए में संस्कृत के लेक्चर में ज्यादार चुपचाप ही रहता था ।
कई बार प्रोफेसर कोई प्रश्न पूछती तो में जानते हुए भी वो बता न पाता था , अब पूछो क्यों क्योंकि मेरी संस्कृत की क्लास में , मै अकेला ही लड़का था , वैसे तो ओर भी दो थे लेकिन वो मुश्किल से ही कॉलेज आया करते थे ।
अब 30 लड़कियों में, मैं अकेला लड़का था....इसलिए मेरे अंदर झिझक का होना तो स्वभाविक था ही ।
इस कारण से क्लास में ज्यादातर लडकिया कभी कभी मेरी चुटकी भी ले लिया करती थी।
अब में संस्कृत पड़ता तो रोज था लेकिन किसी को महसूस नही होने देता था , सच बताऊ तो वार्षिक परीक्षा आते आते ,में उन सबसे बहुत ज्यादा
Knowledgeble हो गया था ।
खेर परीक्षा आ गयी और में अपनी पूरी तैयारी के साथ एग्जाम रूम में जाकर बैठ गया ,
अब जब तक एग्जाम पेपर हाथ मे न आ जाये तब तक शरीर मे एक बैचेनी सी रहती है ,
खेर मेरे हाथ मे एग्जाम पेपर आ ही गया पेपर देखते ही मेरा चेहरा खिल उठा क्योंकि जिन प्रश्नों की मेने तैयारी की थी वही प्रश्न एग्जाम में आये हुए थे ,
मेने वो झट से सारा पेपर डेढ़ घंटे में कर दिया और आराम से चुप चाप बैठ गया ,वैसे भी जिस छात्र के पास इंटर में पीसीएम जैसे भारी भरकम सब्जेक्ट हो उसके लिए ऐसा पेपर बहुत ही सरल था ,
में पेपर करने के बाद अपने आस पास के सभी स्टूडेंट पर नजर घुमाकर देख रहा था ,तभी मेरे बाये तरफ एक लड़की जो पूरी क्लास में खुद को सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट मानती थी ओर कुछ हद तक वो होशियार थी भी।किन्ही कारणों से उस लड़की का नाम मैं यंहा सार्वजनिक नही कर सकता ।
उस लड़की ने मुझसे इसारे में दबी सी आवाज से पूछा तुमने सारा पेपर सॉल्व कर दिया , मेने भी गर्दन हिलाकर हा कर दी । तब उसने कहा plz कुछ क्युस्चन मुझे भी बता दो , तब फुस फूसि सी आवाज में मैने गर्दन नीची करते हुए उसे कई सवालों के उत्तर बता डाले अब आखिर टीचर तो टीचर होता है ,
तभी जो हमारे रूम की एग्जामिनर थी उसने मुझे आकर पकड़ लिया । और मेरी उत्तर पुस्तिका ले ली, मेरे कुछेक सवाल बाकी थे जिनका मुझे नही पता था , में सोच रहा था इन्हें बाद में तुक्के मार कर कुछ वैसे ही कर दूंगा जैसे तीन चार पार्टी मिलकर सरकार बनाती है या फिर क्रिकेट मैच के अंतिम ओवरों में जैसे जाहिर खान बेटिंग करते वक़्त आड़े तिरछे शॉट मार करके रन कूट भी लेता है और नही भी ।
बस में भी कुछ वैसी ही जुगत लगा कर उन सवालों को दागने वाला था, लेकिन तभी टीचर ने आकर मेरी उत्तर पुस्तिका ले ली और एग्जाम रूम से बाहर जाने को कहा, मेने मेडम से rqst भी की । लेकिन कोई बात न बनी
तभी टीचर ने कहा अच्छा ये "बताओ तुम इस लड़की से उत्तर पूछ रहे थे या फिर इसको बता रहे थे ".? उसके बाद ही में तुम्हे तुम्हारी उत्तर पुस्तिका वापस दूंगी ।
अब मेने उस लड़की की तरफ देखा जो शर्म के मारे अपनी आंखों को झुकाये खुद में ही सिमट रही थी ।
बस पता नही मुझे क्या हुआ उस दिन मेने टीचर से पहली बार झूट बोला । मेने टीचर से कहा - कि मेम में ही उस लड़की से सवाल पूछ रहा था । उसके बाद तो मेम ने सीधा सीधा मुझे बाहर जाने को कहा , बोली कि तुम फिर इसे परेशान करोगे अब तुम्हे पेपर शीट नही मिलेगी । "गेट आउट "
सभी स्टूडेंट के सामने ये मेरा बहुत बड़ा अपमान था ।
खेर फिर भी मेरे चेहरे पर लेश मात्र भी निराश न थी ।
क्यों .? क्योंकि किसी के लिए किए गए त्याग और समर्पण का अपना एक अलग ही आनंद है ।
मन में एक गहरी शांति थी । और चित्त भी प्रश्न था ,
एग्जाम खत्म हुआ सब स्टूडेंट बाहर आ गए। में वही पास की दुकान पर खड़ा कोल्ड ड्रिंक पी रहा था , जैसे ही बस आई तो सब स्टूडेंट बस में चढ़ गए लेकिन वो लड़की नही चढ़ी , जब अगली बस आई तो में उसमे चढ़कर बैठ गया झट से वो लड़की भी मेरे पास वाली सीट पर आकर बैठ गयी , तभी में अचानक से ठिठक गया क्योंकी गांव देहात में ऐसी स्थिति में बैठे लड़के और लड़की को लोग संवेदन सील दृष्टि से देखते है । में अपने को इस स्थिति में असहज महसूस कर ही रहा था कि तभी उस लड़की ने कहा ..थैंक्यू मोहित ।
ओर फिर प्रश्न किया कि तुमने एग्जामिनर से झूठ क्यों बोला?
बस मेने उसे इतना ही कहा - कि वैसे भी क्लास में ओर टीचर की दृष्टि में मेरा कोई विशेष सम्मान नही है में अपमानित हुआ कोई बात नही वैसे भी हम लड़को की इज्जत बेइजती कोई मायने नही रखती। लेकिन तुम पूरी क्लास में सबसे ज्यादा होशियार हो और तुम्हारी बहुत रेस्पेक्ट भी है । बस इसीकारण से मैने झूट बोल दिया ,
ताकि तुम्हारा सम्मान बना रहे ।
मेरा उत्तर सुनकर उस लड़की ने अपनी भीगी आंखों से कहा कि मुझे नही पता था ऐसे भी लड़के होते है जो लड़कियों की इतनी रेस्पेक्ट करते है ।
तुम्हें दिल से थैंक्यू मोहित ।
मेरा बस स्टैंड आ चुका था , में गाड़ी से उतरकर अपने रास्ते की ओर चल पड़ा , लेकिन गाडी के आंखों से ओझल होने तक वो लड़की मुझे देखती रही शायद उसकी बात अभी खत्म नही हुई थी...
-----------------कुंवर मोहित राणा
Tuesday, 13 June 2017
एग्जाम रूम में जब मुझे बाहर निकाल दिया गया
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