प्यास क्या होती उस रात पता चला.... , पढिये ये आपबीती कहानी
जोनल गेम्स में एकबार मुझे कॉलेज की तरफ से खुर्जा जाना पड़ा , चुकी मैं कॉलेज की तरफ से वॉलीवाल का एक सीनियर ओर पास आउट स्टूडेंट था , मेरे जूनियरो के विशेष आग्रह पर में भी उनके साथ जोनल गेम्स में पहुच गया,
दुष्यन्त राघव नाम का मेरा एक जूनियर था जो वही खुर्जा से बिलोंग करता था , वैसे तो हम सभी खिलाड़ियों के लिए कॉलेज होस्टल में ठहरने की विशेष सुविधा उपलब्ध थी , फिर भी दुष्यन्त के विशेष आग्रह पर मेने ओर मेरे एक दोस्त अमित शर्मा ने उसके घर पर ही ठहरना उचित समझा ,
हमारे साथ एक स्टूडेंट ओर था जिसका नाम अभिनव चौहान था जो दुष्यन्त का मित्र ओर मेरे लिए छोटे भाई की तरह था ।
अब हम तीनों दुष्यन्त के साथ उसके घर की ओर चल पड़े ,
उस रात को दुष्यन्त के घर पर हमारी जमके खातिरदारी हुई ,
(उस रात ओर उन यादगार पलो के लिए दुष्यन्त को में आज यहां से धन्यवाद देना चाहूंगा )
खाना खा पीने के बाद हमारी सोने की व्यवस्था ऊपर वाले कमरे में कि गयी ।
दुष्यन्त हम तीनों का बिस्तर ऊपर वाले कमरे में लगा कर चला गया,
उस रात दुष्यन्त की सबसे बड़ी गलती ये रही कि वो सीढियो वाले दरवाजे को बाहर से बंद करके चला गया ,
मतलब अब हम तीनो ऊपर वाली छत पर पूरी तरह लॉक हो चुके थे ,ओर इस बात की हमे कोई खबर भी न थी ,
अगले दिन अभिनव का सांस्कृतिक प्रोग्राम था उसने नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया हुआ था , तब मैंने अभिनव को कहा कि चल डांस का रिहर्सल कर ले कल सुबह तेरी इवेंट भी है , तब अमित ने भी मेरी हा में हां मिलाते हुए उसे कहा कि हां चलो तुम्हारा रिहर्सल हो जाएगा और हमारा मनोरंजन भी ।
तब अभिनव ने उस रात हमे डांस करके दिखाया ओर वाकई उसका डांस काबिले तारीफ भी था क्योंकि उसने राजपकपूर के गाने "मेरा जूता है जापानी" पर जबरदस्त एक्टिंग के साथ सेम टू सेम रोल प्ले किया था ।उसने ओर भी गानों पर एक से एक डांस किया ।
बस हम रात भर युही मस्ती करते करते सो गए ,
अब रात के 2 बजे थे मेरी सोते सोते आंख खुली, मेरा गला सूख रहा था मुझे बड़े जोरो की प्यास लगी हुई थी , मेने पूरे कमरे में नजर दौड़ाई कही भी पानी रखा हुआ दिखाई नही दे रहा था , दरअसल खाना खाने के बाद में कभी भी पानी नही पीता ओर इसलिए उस दिन भी खाना खाने के बाद मेने पानी नही पिया था , इसलिए जोरदार प्यास लगनी तो निश्चित सी बात थी,
थोड़ी देर तक खाट पर लेटा हुआ मैं पानी के बारे में सोच ही रहा था कि अभिनव की भी प्यास के कारण आंख खुल गयी,
ओर उसने भी उठते ही पानी पीने की इच्छा जताई ओर बोला मोहित भाई बहुत तेज़ प्यास लगी हुई है और साथ ही साथ बोल उठा आप क्यों जगे हुए हो .?
मेने भी कहा जिस वजह से तू अब जगा है मेरी वजह भी वही है ।
अब मेने उसे कहा चल नीचे जा ओर पानी ले आ बुरी तरह से प्यास लगी है और गला भी सूख रहा है , खेर उसने तुरंत मेरी आज्ञा का पालन किया और शर्दी की उस रात में गर्म रजाई का मोह त्यागकर बिस्तर से उठा , जैसे ही वो रूम से बाहर निकल कर सीढियो (जिसे गांव में जिन्ना भी बोलते है ) पर लगे दरवाजे पे पहुचा तो पाया दरवाजा बाहर से लॉक है , वापस रूम में लौटकर उसने मुझे बताया कि भाई नीचे जाना नामुमकिन है क्योंकि सीढियो का दरवाजा बाहर से बंद है । हम दोनों की चहलकदमी की आवाज से अब अमित शर्मा भी उठ गया ओर उसने भी उठते ही एक ही चीज मांगी "पानी"
यानी हम तीनो अब जोम्बी की तरह हो गए थे,
एक के बाद एक मे वही असर दिख रहा था , प्यास ................
जब अमित को पानी की सारी कहानी बताई तो उसने अभिनव को कहा अरे दुष्यन्त का फोन लगा .....
वो पानी लेकर आएगा ।
दिल अचानक से खुश हुआ चलो ये रस्ता तो है हमारे पास क्यों न दुष्यन्त को फोन लगाया जाए ,
प्यास जोरो पर थी , गला सूख रहा था ,पानी का नाम लेते ही प्यास अपनी चरमसीमा पर पहुँच जाती थी ,
तभी नम्बर डायल करते ही आवाज आई कि -"आप जिस नम्बर पर सम्पर्क करना चाहते है वो अभी बन्द है "
धत तेरी की गयी भैंस पानी मे आखिरी उम्मीद भी अब टूट चुकी थी हम तीनो का प्यास के कारण बुरा हाल था ,सुबह होने में अभी 4 घंटे बाकी थे , शर्दी की उस रात में प्यास की वजह से हमे पसीना आ रहा था , बुरी तरह फसे अब क्या करे ?आखिर अनजान जगह पर इतनी रात गए हल्ला गुल्ला करके किसी को जगाना भी तो उचित न था ।
में ओर अमित अपनी अपनी खाट पर बैठे थे , ओर अभिनव पानी की जुगत में इधर उधर घूम रहा था कमरे में सिर्फ वो गिलास था जिसमे हमने रात को दूध पिया था ,हम लगभग उस गिलास में एकसौ बार झांक कर देख चुके थे शायद पानी कही से इसमे आ गया हो ,
बस उसी गिलास को हाथ मे लिए अभिनव इधर से उधर घूम रहा था , शायद उसको हम दोनों का प्यास के कारण छटपटाना देखा न जा रहा था ।तभी अभिनव रूम से बाहर गया और थोड़ी देर बाद अंदर आया उसके हाथों में वही गिलास था , उसने मुझसे कहा गुरुजी ये लो पानी पियो ...में बड़ा हैरान था ....पानी ..?? अरे कहा से लाया .?
उसने कहा पहले पियो मेने कहा हम तीन है और ये एक गिलास पानी ..????
उसने कहा चिंता मत करो मेने पी लिया है अब तुम भी पियो ...।
मेने खटाक से पूरा गिलास गटक लिया।
लम्बी सांस लेते हुए मेने उससे कहा एक ओर मिलेगा उसने कहा बिल्कुल अभी लाया ।
थोड़ी देर बाद वो फिर एक गिलास पानी ओर ले आया ऐसे करके मेने तीन गिलास पानी पिया , उसके बाद अमित ने भी यही सवाल किया के पानी ला कहा से रहा है तू..?
वो बस यही कहता कि गुरुजी पहले आप पानी पियो ......।
हम दोनों पानी पी चुकने के बाद एक लंबी सांस ले रहे थे उस समय हमे जो आनंदमय अहसास हो रहा था उसे शब्दो मे बया करना मुश्किल है, ऐसा लग रहा था मानो मृत शरीर में नई चेतना आ गयी हो ,
अब हम दोनो ने अभिनव से पूछा बता अभिनव पानी कहा से लाया तू..?
उसने कहा रहने दो गुरु जी आपकी प्यास बुझ गयी और क्या चाहिए आपको ,
हमने कहा नही ये रहस्य तो तुझे बताना पड़ेगा यहां दूर दूर तक कोई पानी का साधन नही फिर भी तू पानी ले आया...कैसे..????
तब जोर देने पर उसने कहा कि गुरुजी गुस्सा मत होना
" में छत की आखिर में बनी लेटरिंग (टॉयलेट) की टोंटी से पानी लाया हूं.............樂
------------कुँवर मोहित राणा
Diggvijay Singh Rajput
Dushyant Raghuvanshi
Amit Kumar













